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कविता - समर्पण

यह कविता वीररस की है इस कविता में सैनिक भारत भारत माँ का बेटा होकर उसकी सेवा करता है और अमर होने की चाह रखता है औरअपने देश भारत की सेवा करते हुवे खुद को धन्य बताता है और उसकी कोई अभिलाषा इच्छा शेष नही रह जाती

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कविता

मैं नेता जी बोल रहा हूँ, सुनो जनता की टोली जीएक बात ध्यान से सुननास्वार्थ से लबालब भरी है मेरी…
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तुम्हे क्या जवाब दूँ

कमल या फूल गुलाब दूं?मैं सोचता हूं,तुम्हें क्या खिताब दूं?हवा को कह दूं झूमें तेरे आने पर?फूलों की बरसात उनके…
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The Thief

The brave police, from the CCTV footage, were able to identify her,Without wasting much time, they found her and arrested…