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Poem by Shantanu Singh

खुशी क्या है अब तो भूल सा गया है
ज़िन्दगी की दौड़ में समा जो गया है
याद आते है वो पल जब हम भी बच्चे थे
छोटी छोटी बातों में इसे खोज लिया करते थे

चाहे वो नानी का घर हो या पापा के दिये पैसे,
उन्ही से खुसी खरीद लिया करते थे.
छोटी छोटी बाते औऱ औऱ खुश होके सोना
अब याद करता हूं तो आता है थोड़ा रोना

शायद अव बो नही लौटेगा जो चला गया है
खुशी क्या है भूल वो गया है
वो मेरी जेब से कंचो के आवाज़ की खुशी,
वो मेरी गुल्लक की खनक
वो शनिवार के tv शोअब कँहा खुसी देते है, 

उन्है तो कंही पीछे छोड़ सा गया है
खुशी क्या है अब तो भूल सा गया है

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